मेरे सनकी अरबपति बनने से पहले

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अध्याय 133

कियरन की नज़र से

शनिवार को करीब दोपहर के वक्त दरवाज़ा खुला। ताले के घूमने की आवाज़ सुनते ही पेट में वही पुराना, जाना-पहचाना डर ऐंठ गया। सबसे पहले माँ अंदर आईं—कोट के बटन उलटे लगे थे, बाल बिखरे हुए थे, और आँखों के नीचे मेकअप फैला हुआ था जहाँ रो-रोकर सब धुल गया था। वे मेरी तरफ़ देखने से बचती रहीं...

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